सोमवार, 25 जनवरी 2010

love day

लव डे

हुस्न वालों की रात है आज
दिलवालों की बात है आज
हम तो है पत्थर दिल, हमारी क्या औकात है आज
कहाँ फसा रहे हो हमे हुस्न वालों के झमेलों में
हम तो फसे है, पहले से गुर्वातों के मेलों में

शादी  करलो
किसी ने मुझसे कहा "यार शादी करलो अब"
"अम्मा कहा फस रहे हो हम, हम इन सब चीजों से उपर की वस्तु है"
- वैसे भी हमरे अब्बा हुजुर कहा करते थे
"मिया निकहा वही करना जहा देने के लिए म्हेर की जरुरत न हो, और घर वही बसना जहा कोई गाऊ शहर न हो"
"तो अब तक कोई ऐसी जगहे ही नहीं मिली जहा कोई गाऊ शहर न  हो, ऐसी कोई लड़की भी तो नहीं मिली जिसको मेहर की जरुरत ही न हो"

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